HPAS Previous Year Question Paper 2018 – HP GK

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#1. Which of the following valleys lies between the Dhauladhar and Pir Panjal? / धौलाधार और पीर पंजाल के बीच निम्नलिखित में से कौन सी घाटियाँ हैं?

(B) The Bada Banghal valley (CORRECT ANSWER)

  •  It is adjoining to the Kangra valley and lies between the Dhauladhar and Pir Panjal ranges.
  •  It is partly in Kangra and partly in Chamba district.
  • The river Ravi Rises from the slope of this Valley by joining of Tanta Giri and Bhandal streams.

बडा बंगाल घाटी

• यह कांगड़ा घाटी से सटा हुआ है और धौलाधार और पीर पंजाल श्रेणियों के बीच स्थित है।
• यह आंशिक रूप से कांगड़ा और आंशिक रूप से चंबा जिले में है।
• रावी नदी तांता गिरी और भंडाल धाराओं से मिलकर  यह घाटी के ढलान से निकलती है।

(A) Balh valley:

  • The Balh valley lies in Mandi district at an average elevation of 800 mts.
  • The valley stretches from Shimla ridge through Shivalik hills and Gutker in the north to Sundernagar in the south, Baggi in the east, and Galma in the West.
  • Suketi stream, the greatest benefactor of the valley divides it roughly into two parts.
  • The soil is sandy loam to loam in texture and light grey to brown in colour.
  • The main crops grown in the valley are wheat, maize, sugarcane, ginger, and paddy.
  • In November 1962, Indo-German Agricultural Project was started in Balh valley. It emphasized mixed farming, dairying, animal husbandry, horticulture, and vegetable cultivation. Manuring and soil conservation were also included in the Project.

बल्ह घाटी:

  • बल्ह घाटी मंडी जिले में 800 मीटर की औसत ऊंचाई पर स्थित है।
  • घाटी शिमला रिज से शिवालिक पहाड़ियों के हिस्सों में और उत्तर में गुटकेर से दक्षिण में सुंदरनगर, पूर्व में बग्गी और पश्चिम में गामा तक फैली हुई है।
  • सुकेती धारा, घाटी का सबसे बड़ा दाता इसे लगभग दो भागों में विभाजित करती  है।
  • यहाँ मिट्टी रेतीली दोमट होती है जो बनावट में दोमट होती है और हल्के भूरे से भूरे रंग की होती है।
  • घाटी में उगाई जाने वाली मुख्य फ़सलें गेहूँ, मक्का, गन्ना, अदरक और धान हैं।
  • नवंबर 1962 में, बल्ह घाटी में इंडो-जर्मन कृषि परियोजना शुरू की गई। इसमें मिश्रित खेती, डेयरी, पशुपालन, बागवानी और सब्जी की खेती पर जोर दिया गया। परियोजना में खाद और मृदा संरक्षण को भी शामिल किया गया।

(C) PAONTA OR KIARDA DUN VALLEY

The Paonta or Kiarda Dun valley of Sirmur lies between the eastern extremities of Markanda and the Dharti ranges. The Yamuna separates it from Dehra Dun. The valley may be divided into three distinct tracts:

(i) The Dun proper which lies between the Yamuna and the lower parts of Dharti range and Poka hills, and is partially watered by the Giri and the Bata streams.

(ii) The tract which comprises the Neli Khera and the adjacent hills of the lower Dharti on the north of the Bata, the cast of Jamun Khala, west of Tila Gharib Nath, and south of Rajban which indeed may be regarded as included in it as it is a plain area.

(iii) The Par Dun tract, which is surrounded by hills and lies near Majra village. This is a natural fortress, only accessible by one road and now a deserted waste forest, though the terrain shows that it was once cultivated.

(iv) Most of the plain area, namely Kiarda Dun, falls within the Cis-Giri division but only a very small part in a corner, spreading across the Giri, falls into the trans-Giri division.

 Kiarda dun valley, once a dense forest providing shelter to tigers and elephants, in the time of Raja Shamsher Prakash had people settled in it. The valley is very productive as it is watered by Giri and Bata rivers. Hills torrents also irrigate parts of the hill tracts and plain area. Wheat, maize, ginger, millet, and sugarcane are the major crops. The people are well off. Paonta Sahib is an important town. There is a famous Sikh Gurudwara and Ram Mandir. Paonta is becoming an important industrial area.

पोंटा या कियारदा दून घाटी

सिरमौर का पांवटा या कियारदा दूनघाटी घाटी, मार्कंडा और धारटी पर्वतमाला के पूर्वी छोरों के बीच स्थित है। यमुना ने इसे देहरादून से अलग कर दिया। घाटी को तीन अलग-अलग पथों में विभाजित किया जा सकता है:

(i) दून पुराना जो कि यमुना और धार्टी पर्वतमाला और पोका पहाड़ियों के निचले हिस्सों के बीच स्थित है, और यहाँ  गिरि और बाटा  धाराओं द्वारा आंशिक रूप से पानी सींचा जाता है।

(ii) वह प्रणाली जिसमें बेली के उत्तर में नीली खेरा और निचली धरती के आस-पास की पहाड़ियाँ हैं, जो जामुन खाला, टीला ग़रीब नाथ के पश्चिम में है, और राजबन के दक्षिण में स्थित है जिसे वास्तव में इसमें शामिल माना जा सकता है। यह एक मैदानी क्षेत्र है।

(iii) पार दून पथ, जो माजरा गाँव के पास पहाड़ियों से घिरा हुआ है। यह एक प्राकृतिक किला है, जो केवल एक सड़क और अब एक निर्जन अपशिष्ट जंगल द्वारा सुलभ है, हालांकि इलाके से पता चलता है कि यहा एक बार खेती की गई थी।

(iv) अधिकांश सादा  क्षेत्र, जिसका नाम कियारदा दून है, सिस-गिरि डिवीजन के भीतर आता है लेकिन गिरी में फैला एक कोने में केवल एक बहुत छोटा हिस्सा, ट्रांस-गिरी डिवीजन में गिरता है।

राजा शमशेर प्रकाश के समय में कियारदा दून घाटी, बाघों और हाथियों को आश्रय प्रदान करने वाला एक घना जंगल था, जिसमें लोग बसे थे। घाटी बहुत उत्पादक है क्योंकि इसे गिरि और बाटा नदियों के पानी द्वारा सींचा जाता है। पहाड़ियों की धार भी पहाड़ी इलाकों और मैदानी क्षेत्र के कुछ हिस्सों को सींचती है। गेहूं, मक्का, अदरक, बाजरा और गन्ना प्रमुख फसलें हैं। पांवटा साहिब एक महत्वपूर्ण शहर है। एक प्रसिद्ध सिख गुरुद्वारा और राम मंदिर है। पांवटा एक महत्वपूर्ण औद्योगिक क्षेत्र बनता जा रहा है।

(D) Pabbar Valley

  • This is also Known as Rohru Valley, drained by the river Pabbar which originates from Chansal peak South of Kinnaur and its tributaries.
  • The valley extends from Hatkoti up to Tikiri at the base of Chansal. 
  • During summer Pubber valley is quite hot. 
  • The important streams passing through this valley are Andhra Khad, Pejore and Shhikri streams. 
  • Chirgon, Rohru, Hatkoti, and Sarasvati Nagar are the main towns on the riverside of Pabbar. 
  • This valley is famous for its apple orchards.

पब्बर घाटी

  • यह रोहड़ू घाटी के रूप में भी जाना जाता है, जो कि पब्बर नदी से बहती है जो किन्नौर की चांशल चोटी किन्नौर के दक्षिण में  और इसकी सहायक नदियों से निकलती है।
  • चांशल के आधार पर टिक्करी घाटी से हाटकोटी तक फैली हुई है।
  • गर्मी के दिनों में पब्बर  घाटी काफी गर्म होती है।
  • इस घाटी से गुजरने वाली महत्वपूर्ण धाराएँ आंध्र खड़, पीजोर और शिखरी धाराएँ हैं।
  • पब्बर के नदी किनारे चिरगांव, रोहड़ू, हाटकोटी और सरस्वती नगर मुख्य शहर हैं।
  •  यह घाटी अपने सेब के बागों के लिए प्रसिद्ध है।

#2. Which of the following Himalayan zones occupies the maximum percentage of the total geographical area of Himachal Pradesh? / निम्नलिखित में से कौन सा हिमालयी क्षेत्र हिमाचल प्रदेश के कुल भौगोलिक क्षेत्र के अधिकतम प्रतिशत है?

(D) Tibetan Himalayan or cold zone or Trans Himalayan Zone ( Correct Answer )

  • 36± percent 1600-3600 meters and above.
  • Lahaul Spiti and Kinnaur range.
  • Dry cold temperate snowy and frigid and rainfall less than 500mm, mostly snow.
  • Sub alpine, moist and dry alpine-like Kharsu Blue Pine, Juniper
  • ट्रांस हिमालयन ज़ोन
  • 36 प्रतिशत 1600-3600 मीटर और उससे अधिक।
  • लाहौल स्पीति और किन्नौर रेंज।
  • शुष्क शीतोष्ण बर्फीली और शुष्क और 500 मिमी से कम बारिश, ज्यादातर बर्फ।
  • उप अल्पाइन, नम और सूखी अल्पाइन जैसे खारसु ब्लू पाइन, जुनिपर

(A) Outer Shiwalik or Sub-Himalayan Zone

  • 30 ± percent Upto 800 Meters.
  • Foothill and valley areas.
  • Sub-tropical and rainfall 1500 mm.
  • Tropical thorn and dry deciduous sal and other mixed vegetation and grasses.
  • उप-हिमालयी क्षेत्र
  • 30 प्रतिशत 800 मीटर तक ।
  • तलहटी और घाटी क्षेत्र।
  • उपोष्णकटिबंधीय और वर्षा 1500 मिमी।
  • उष्णकटिबंधीय कांटा और शुष्क पर्णपाती साल और अन्य मिश्रित वनस्पति और घास।

(B) Mid-Himalayan Zone

  • 10± percent 800-1600 meters.
  • Hilly and mountainous.
  • Mild warm temperate and rainfall 1500 to 3000 mm.
  • Subtropical broad leaves and Pine and grasses.
  • मध्य-हिमालयी क्षेत्र
  • 10 प्रतिशत 800-1600 मीटर।
  • पहाड़ी / पर्वतीय ।
  • हल्की गर्म शीतोष्ण और वर्षा 1500 से 3000 मिमी।
  • उपोष्णकटिबंधीय विस्तृत पत्ते और पाइन और घास।

 (C) Higher Himalayan or High Hill Zone

  • 25± percent 1600-2700 mtrs .
  • Alpine Pastures. Humid cool temperate and rainfall 1000-1500 mm.
  • Some snow.
  • Wet and Himalayan temperate like Deodar, Spruce, Kail, Chestnut, Walnut, maple, and alpine pastures.
  • ट्रांस हिमालयन ज़ोन
  • 25 प्रतिशत 1600-2700 मीटर ।
  • अल्पाइन चरागाह। आर्द्र शीतोष्ण और वर्षा 1000-1500 मिमी।
  • कुछ बर्फ।
  • देवर, स्प्रूस, कैल, चेस्टनट, अखरोट, और मेपल, आद्र और हिमालयी समशीतोष्ण, अल्पाइन चरागाह ।

 

 

#3. Shingo-La is the name of which pass? / शिंगो-ला किस दर्रे का नाम है?

(A) Shingo-la or Zanskar Pass (Correct Answer)

Shingo La, Shinkun La, Shinku La, Shingu La or Zanskar Pass is a high mountain pass situated at the top of the Zanskar ravine on the border between Jammu and Kashmir and Himachal Pradesh connecting the Lahaul Valley with Zanskar Valley in India at an elevation of 5.091m (16,703ft) above the sea level. It is used on a few occasions by the petty traders between Lahaul and  Zanskar in Ladakh.

This high mountain pass is the entry point to Lugnak Valley in Zanskar. Kurgiakh is the nearest inhabited village on side of Zanskar is and Chikka on the side of Lahaul.

शिंगो-ला या ज़ांस्कर पास

शिंगो ला, शिंकुन ला, शिंकू ला, शिंगु ला या ज़ांस्कर दर्रा एक उच्च पर्वतीय दर्रा है जो जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश के बीच की सीमा पर लाहौल घाटी को ज़ांस्कर घाटी से जोड़ता है। यह समुद्र तल से 5.091 मीटर (16,703 फीट) की ऊंचाई पर है । लद्दाख में लाहौल और ज़ांस्कर के बीच व्यापारियों द्वारा कुछ अवसरों पर इसका उपयोग किया जाता है। यह उच्च पर्वत दर्रा ज़ांस्कर में लुगनाक घाटी का प्रवेश स्थल है। कर्सियाख ज़ांस्कर की ओर से निकटतम गाँव है और लाहौल की तरफ चिक्का है।



(B) Baralacha Pass

Situated on Manali –Leh road, about 75 Km from Keylong towards Leh, is at an elevation of 4890mts and nearly  8 km long. It is known as the” pass with crossroads on the summit” and the roads from Zanskar, Ladakh, Spiti, and Lahaul meet on the top of it.

Its estimated height to the range is about 16221 to 16500, feet above the mean sea level, lying between Zingzingbar and Lingti encamping grounds. It is open to traffic from June to October.

बारलाचा दर्रा

मनाली-लेह रोड पर स्थित, केलांग से लेह की ओर लगभग 75 किलोमीटर की तरफ है, जो कि 4890 मीटर ऊंचाई और लगभग 8 किमी लंबी है।  इसे “शिखर पर क्रॉस सड़कों के साथ पास” के रूप में जाना जाता है और ज़ांस्कर, लद्दाख, स्पीति और लाहौल की सड़कें इसके शीर्ष पर मिलती हैं। इसकी अनुमानित ऊँचाई लगभग 16221 से 16500 फीट, यह ज़िंगजिंगबार और लिंगी एन्कम्पिंग मैदानों के बीच स्थित है। यह जून से अक्टूबर तक यातायात के लिए खुला रहता है।

(C) Rohtang Pass:

Rohtang Pass connects  Lahaul Valley with Kullu valley. It lies at an elevation of 3978 meters. on Pir Panjal range on the National Highway to Leh. The literal meaning of Rohtang is “pile of corps” due to the heavy toll of lives, it is notorious for its sudden blizzards and snow for 7-8 months in a year.

The first Englishman to reach the Rohtang Pass was Moorecraft who called it Ritanka Jot. He was followed by a second expedition undertaken by Dr.J.G. Gerard, Lord Elgin the then Governor-General crossed it twice on this same day in 1863. 

River Beas originates from Rohtang pass.

रोहतांग दर्रा

रोहतांग दर्रा लाहौल घाटी को कुल्लू घाटी से जोड़ता है। यह राष्ट्रीय राजमार्ग पर लेह तक पीर पंजाल रेंज पर 3978 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। रोहतांग का शाब्दिक अर्थ है “लाशों का ढेर”, एक वर्ष में 7-8 महीनों के लिए बर्फ के लिए कुख्यात है। रोहतांग दर्रे तक पहुँचने वाला पहला अंग्रेज “मूरक्राफ्ट” था जिसने इसे “रितंका जोत” कहा। उनके बाद डॉ जे.जी. जेरार्ड, द्वारा किया गया दूसरा अभियान था।  तत्कालीन गवर्नर जनरल लॉर्ड एल्गिन ने 1863 में एक ही दिन में दो बार इसे पार किया था।

नदी ब्यास का उद्गम रोहतांग दर्रे से होता है।


(D) Jalori Pass

This pass on Dholadhar range lies between Mangalore and Kot in Seraj in Kullu district. It is a very beautiful pass, being richly wooded on both sides. The Jalori Pass remains closed during winter. It demarcates the boundaries of Kullu and Mandi districts.

It separates inner and outer Seraj and Servalsar lake is situated at the top of Jalori pass in Kullu District.


जलोड़ी पास

धौलाधार श्रेणी का यह मार्ग कुल्लू जिले के सेराज में मंगलौर और कोट के बीच स्थित है। यह एक बहुत ही सुंदर दर्रा है, जिसके दोनों तरफ बड़े पैमाने पर जंगल हैं। जलोड़ी दर्रा सर्दियों के दौरान बंद रहता है। यह कुल्लू और मंडी जिलों की सीमाओं का सीमांकन करता है। यह आंतरिक और बाहरी सिराज को अलग करती है और कुल्लू में जलोड़ी पास के शीर्ष पर स्थित सर्वलसर झील है |

 

#4. Where does river Yamuna, after flowing through Uttrakhand, enter in Sirmaur district of Himachal Pradesh? / उत्तराखंड में बहने के बाद यमुना नदी हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले में कहाँ प्रवेश करती है?

YAMUNA:

It enters Himachal Pradesh at ‘Khadar Majri’in Sirmaur district and it leaves the state near “Tajewala’ to enters the Haryana state. Yamuna river is the largest tributary of the Ganga. The Yamuna has mythical relation to the Sun. 

It rises from Yamunotri in Garhwal hills and forms the Eastern boundary with Uttarakhand. The Yamuna is the Eastern-most river of Himachal Pradesh. 

Its famous tributaries are Tons, Pabbar, and Giri or Giri Ganga. The Giri Ganga rises from near ‘Kupar peak just above Jubbal town in Shimla district, Tons from Yamunotri and Pabbar from Chandra Nahan Lake near the ‘Chanshal peak’ in Rohru tehsil of Shimla district. Its total catchment area in Himachal is 2,320 square km.  It flows nearly 22 km. in Himachal Pradesh.

यमुना:

यह हिमाचल प्रदेश में ‘खादर माजरी’ सिरमौर जिले में प्रवेश करती है और यह राज्य को “ताजेवाला ‘के पास छोड़कर हरियाणा राज्य में प्रवेश करती है। यमुना नदी गंगा की सबसे बड़ी सहायक नदी है। यमुना का सूर्य से पौराणिक संबंध है।

यह गढ़वाल की पहाड़ियों में यमुनोत्री से निकलती है और उत्तराखंड के साथ पूर्वी सीमा बनाती है। यमुना हिमाचल प्रदेश की सबसे पूर्वी नदी है।

इसकी प्रसिद्ध सहायक नदियाँ टोंस, पब्बर और गिरि या गिरि गंगा हैं। गिरि गंगा शिमला जिले के जुब्बल शहर के ठीक ऊपर ‘कुपर शिखर से, यमुनोत्री से टोंस नदी और पब्बर  शिमला जिले की रोहड़ू तहसील में’ चंसल शिखर ‘के पास चंद्र नाहन झील से निकलती है। हिमाचल में इसका कुल जलग्रहण क्षेत्र 2,320 वर्ग किमी है। यह हिमाचल प्रदेश में लगभग 22 किमी बहती है।

#5. The movement started under the aegis of ‘Kisan Sabha’ in which Shri Lakshmi Singh and Vaid Surat Singh played a pivotal role was: / आंदोलन किसान सभा ’के तत्वावधान में शुरू हुआ जिसमें श्री लक्ष्मी सिंह और वैद सूरत सिंह ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई:

Explanation:

In 1942, Pajhota Kisan Sabha started an important struggle known as the Pajhota Movement in Pajhota area of Sirmour State. This movement was basically started by the farmers of the area for agrarian reforms. Lakshmi Singh village Kotla and Vaidya Surat Singh were elected head and secretary of Pajhota Kisan Sabha respectively. Apart from this, Mian Gulab Singh and Atar Singh of Tapuruli village, Chu Chun Mian of Jadol, Mehar Singh of Panakufar, Madan Singh of Dhamla, Jalaam Singh of Varghot, Kaliram Shavani of Neri, etc. But the movement was suppressed with imposing Martial Law by the ruler because the pressure imposed by the peasants was against the wishes and wills of the feudal rulers. 

1942 में, पझोटा किसान सभा ने सिरमौर राज्य के पझोटा क्षेत्र में पझोटा आंदोलन के नाम से एक महत्वपूर्ण संघर्ष शुरू किया। यह आंदोलन मूल रूप से कृषि सुधारों के लिए क्षेत्र के किसानों द्वारा शुरू किया गया था। लक्ष्मी सिंह गाँव कोटला और वैद्य सूरत सिंह क्रमशः पझोटा किसान सभा के प्रधान और सचिव चुने गए। इसके अलावा, टापुरौली गाँव के मियां गुलाब सिंह और अतर सिंह, जादोल के चू चुन मियां, पानकुफर के मेहर सिंह, धामला के मदन सिंह, वरघट के जालम सिंह, नेरी के कलाम शावानी आदि थे, लेकिन मार्शल लॉ लागू करने के साथ आंदोलन को शासक द्वारा दबा दिया गया। क्योंकि किसानों द्वारा लगाया गया दबाव सामंती शासकों की इच्छा के विरुद्ध था।

#6. ‘Democratisation of the Administration’ was the main aim of: / प्रशासन का लोकतंत्रीकरण ’इसका मुख्य उद्देश्य था

Explanations:

The main aim of Praja Mandals in the hills  may be defined as collective ideas and practical work of general masses for the democratisation of administration

The idea of forming Praja Mandals in the hills of the Himalayas was conceived in a session of All India States

People’s Conference held at Ludhiana in 1939 and after this conference. Praja Mandals were created in many hill states. Bhagmal Sautha was the main spirit behind the creation of Praja Mandals in hills. He with the help of Dr. Y.S. Parmar organised the Himalayan States Regional Council in Shimla.

 

पहाड़ियों में प्रजा मंडल का मुख्य उद्देश्य सामूहिक विचारों और प्रशासन के लोकतंत्रीकरण के लिए सामान्य जन के व्यावहारिक कार्यों के रूप में परिभाषित किया जा सकता है।

हिमालय की पहाड़ियों में प्रजा मंडल बनाने का विचार अखिल भारतीय राज्यों के एक सत्र में लिया गया था

1939 में लुधियाना में लोगों का सम्मेलन हुआ और इस सम्मेलन के बाद। कई पहाड़ी राज्यों में पूजा मंडल बनाए गए। पहाड़ियों में प्रजा मंडलों के निर्माण के पीछे भागमल सौथा मुख्य भावना थी। उन्होंने डॉ। वाई.एस. परमार ने शिमला में हिमालयी राज्य क्षेत्रीय परिषद का आयोजन किया।

#7. When Himachal Pradesh got right to participate in the election for the first time under the new constitution? / हिमाचल प्रदेश को नए संविधान के तहत पहली बार चुनाव में भाग लेने का अधिकार कब मिला?

The Himachal Pradesh Legislative Assembly first came into being as a Centrally administered territory on April 15, 1948, by the integration of 30 erstwhile princely States. It was administered by a Chief Commissioner, aided and advised in the discharge of his functions by an Advisory Council Consisting of Nine members, three of whom represented the erstwhile princely States and Six being public representatives.

 In 1951, it became a part ‘C’ State. Himachal Pradesh was brought under a Lt. Governor with 36 members Legislative Assembly. The first election to the Assembly was held in 1952. 

In 1954 Bilaspur, another part-C State was merged with Himachal Pradesh and the strength of its Assembly was raised to 41. 

 

हिमाचल प्रदेश विधानसभा पहली बार 15 अप्रैल 1948 को 30 पूर्ववर्ती रियासतों के एकीकरण से केंद्र प्रशासित क्षेत्र के रूप में अस्तित्व में आई। यह एक मुख्य आयुक्त द्वारा प्रशासित, सहायता प्राप्त और नौ सदस्यों, जिनमें से तीन पूर्ववर्ती रियासतों का प्रतिनिधित्व करते थे और छह जन प्रतिनिधि थे, जिनमें से एक सलाहकार परिषद द्वारा उनके कार्यों के निर्वहन में सलाह दी जाती थी।

 1951 में, यह एक हिस्सा ‘सी’ राज्य बन गया। हिमाचल प्रदेश को 36 सदस्यीय विधानसभा के साथ लेफ्टिनेंट गवर्नर के तहत लाया गया था। विधानसभा का पहला चुनाव 1952 में हुआ था।

1954 में, बिलासपुर, एक अन्य भाग-सी राज्य, हिमाचल प्रदेश के साथ विलय कर दिया गया था और इसकी विधानसभा की ताकत 41 तक बढ़ा दी गई थी।

#8. Which of the following Monasteries was built by a Western Tibet ruler ‘Ye-Sashoad’ around the year 996 A.D.? / निम्नलिखित में से किस मठ का निर्माण पश्चिमी तिब्बत के शासक ' ये शशाद ’ने वर्ष 996 ई के आसपास किया था?

Tabo Monastery (or Tabo Chos-Khor Monastery) is located in the Tabo village of Spiti Valley, Himachal Pradesh, northern India. It was founded in 996 CE in the Tibetan year of the Fire Ape by the Tibetan Buddhist lotsawa (translator) Rinchen Zangpo (Mahauru Ramabhadra), on behalf of the king of the western Himalayan Kingdom of Guge, Yeshe-Ö. Tabo is noted for being the oldest continuously operating Buddhist enclave in both India and the Himalayas. It is often referred to as the Ajanta of the Himalayas. The complex has 9 temples and many stupas—all of which are made in mud and have been standing like this for more than 1000 years. The main temple is an assembly hall where monks used to pray together. A large number of frescoes displayed on its walls depict tales from the Buddhist pantheon. . There are stories of the life of Shakyamuni (the Buddha) and various Bodhisattvas. These temples belong to Buddhist deities like Tara and Buddha Maitreya. There are many priceless collections of thankas (scroll paintings), manuscripts, well-preserved statues, frescos, and extensive murals that cover almost every wall. The monastery is protected by the Archaeological Survey of India (ASI) as a national historic treasure of India. 

Gemur Monastery is a Buddhist gompa, above the village of Gemur, Lahaul and Spiti district, Himachal Pradesh, northern India. It is about 700 m (2,300 ft) on foot from Gemur which is located 18 km (11 mi) upstream from Keylong in the Bhaga River valley, Lahaul. The monastery is around 700 years old.

The Gompa contains a sculpture of the goddess ‘Marichi Vajravarahi’ which dates back to the 11th-12th century AD. The ‘devil dance’ is carried out in the month of July. The monastery also contains ancient Buddhist miniature paintings, wall paintings, stupas, statues, and Buddhist artifacts.

 

Tabo Monastery ( Tabo Chos-Khor Monastery) उत्तरी भारत के हिमाचल प्रदेश के स्पीति घाटी के तबो गाँव में स्थित है। यह तिब्बती बौद्ध लाटवा (अनुवादक) रिनचेन ज़ंगपो (महागुरु रामभद्र) द्वारा पश्चिमी हिमालयी साम्राज्य के गुगे, यशे-Ö की ओर से फायर एप के तिब्बती वर्ष में 996 सीई में स्थापित किया गया था। टैबो को भारत और हिमालय दोनों में सबसे पुराना लगातार संचालित बौद्ध एन्क्लेव के लिए जाना जाता है। इसे अक्सर हिमालय के अजंता के रूप में जाना जाता है। इस परिसर में 9 मंदिर और कई स्तूप हैं- जिनमें से सभी कीचड़ में बने हैं और 1000 से अधिक वर्षों से इस तरह खड़े हैं। मुख्य मंदिर एक सभा भवन है जहाँ भिक्षु एक साथ प्रार्थना किया करते थे। इसकी दीवारों पर प्रदर्शित की गई बड़ी संख्या में भित्तिचित्र बौद्ध पंथ से कथाओं को दर्शाते हैं। । शाक्यमुनि (बुद्ध) और विभिन्न बोधिसत्वों के जीवन की कहानियाँ हैं। ये मंदिर तारा और बुद्ध मैत्रेय जैसे बौद्ध देवताओं से संबंधित हैं। थैंक्स (स्क्रॉल पेंटिंग), पांडुलिपियों, अच्छी तरह से संरक्षित मूर्तियों, फ्रैकोस और व्यापक भित्ति चित्रों के कई अनमोल संग्रह हैं जो लगभग हर दीवार को कवर करते हैं। मठ को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) द्वारा भारत के राष्ट्रीय ऐतिहासिक खजाने के रूप में संरक्षित किया गया है।

जेमुर मठ एक बौद्ध गोम्पा है, जो गूमुर, लाहौल और स्पीति जिले, हिमाचल प्रदेश, उत्तरी भारत के गाँव के ऊपर है। यह जेमूर से लगभग 700 मीटर (2,300 फीट) की दूरी पर है जो भागा नदी घाटी, लाहौल में कीलोंग से 18 किमी (11 मील) की दूरी पर है। मठ लगभग 700 साल पुराना है।

 

गोम्पा में देवी ‘मरीचि वज्रवाराही’ की एक मूर्ति है जो 11 वीं -12 वीं शताब्दी ईस्वी की है। ‘डेविल डांस’ जुलाई के महीने में किया जाता है। मठ में प्राचीन बौद्ध लघु चित्र, दीवार चित्र, स्तूप, मूर्तियाँ और बौद्ध कलाकृतियाँ भी हैं।

 

#9. Which was the old capital of Kullu Rajas from where the twelve generations of Kullu Rajas ruled? / कुल्लू राजाओं की पुरानी राजधानी कौन सी थी जहाँ से कुल्लू राजाओं की बारह पीढ़ियों ने शासन किया था?

Kullu was founded by Vihangmani Pal in the second century Ad. He founded his capital at Nast (Jagatsukh) which remained so until twelve generations.

 Naggar was made capital by Visudh Pal and remained capital till it was transferred to Kullu (Sultanpur), during the rule of Raja Jagat Singh (1637-1672 AD) Sultanpur was made the capital which he won from Raja of Lag.

 

कुल्लू की स्थापना दूसरी शताब्दी में विहंगमणि पाल ने की थी। उन्होंने अपनी राजधानी नास्त (जगत्सुख) की स्थापना की जो बारह पीढ़ियों तक बनी रही।

 नग्गर को विशुध पाल द्वारा राजधानी बनाया गया था और राजा जगत सिंह (1637-1672 ई।) के शासनकाल के दौरान कुल्लू (सुल्तानपुर) में स्थानांतरित होने तक यह राजधानी बनी थी, सुल्तानपुर को वह राजधानी बनाया गया था, जो उन्होंने लाग के राजा से जीती थी।

#10. In 1804 A.D. Rulers of Bilaspur, Mandi, Chamba and other small rulers of Kangra area invited whom to invade Kangra? / 1804 ईस्वी में कांगड़ा क्षेत्र के बिलासपुर, मंडी, चंबा और अन्य छोटे शासकों ने कांगड़ा पर आक्रमण करने के लिए किसे आमंत्रित किया था ?

In 1805, Sansar Chand(Kangra) attacked the hill State of Bilaspur (Kahlur), after that Rulers of Bilaspur, Mandi, Chambaand other small rulers of Kangra area invited Gurkhas to help them defeat Sansar Chand. The Gurkhas responded by crossing the Sutlej river and attacking the Katoch King at Mahal Moria, in May, 1806. Gurkha gained a complete victory, overran a large part of the hill country of Kangra. After three years of anarchy, Sansar Chand asked for the assistance of the Sikhs. Ranjit Singh, signed jwalamukhi treaty, he then entered Kangra and defeated Gurkha in 1809 and katoch lost Kangra fort to sikhs.

1805 में, संसार चंद (कांगड़ा) ने पहाड़ी राज्य बिलासपुर (कहलूर) पर हमला किया, उसके बाद बिलासपुर, मंडी, चंबा के शासकों और कांगड़ा क्षेत्र के अन्य छोटे शासकों ने संसार चंद को हराने में मदद करने के लिए गोरखाओं को आमंत्रित किया। गोरखाओं ने मई, 1806 में सतलुज  नदी को पार करने और महल मोरिया में कटोच राजा पर हमला करके जवाब दिया। गोरखा ने कांगड़ा के पहाड़ी देश के एक बड़े हिस्से पर कब्जा करते हुए पूरी जीत हासिल की। तीन साल की अराजकता के बाद, संसार चंद ने सिखों की सहायता के लिए कहा। रणजीत सिंह ने ज्वालामुखी संधि पर हस्ताक्षर किए, फिर उन्होंने कांगड़ा में प्रवेश किया और 1809 में गोरखा को हराया और कटोच ने कांगड़ा किले को सिखों को खो दिया।

#11. In 1848, who suppressed the rebellion of Wazir of Nurpur and then Pramod Chand and Rajas of Jaswan and Datarpur? / 1848 में, नूरपुर के वज़ीर और फिर प्रमोद चंद और जसवान और दातारपुर के राजाओं के विद्रोह को किसने दबा दिया?

In 1846, the East India Company captured the Kangra valley and subdued the local rulers. Jaswant Singh was also conferred the annual Jagir of Rs. 5,000/- and Nurpur state was merged with Kangra. Gathering a force from the Jammu hills, Ram Singh revolted and suddenly crossed the river Ravi and occupied Shahpur fort, where he proclaimed Jaswant Singh, Raja of Nurpur (In 1848) and himself as his Wazir, but soon afterward on the arrival of the British army, Ram Singh fled to the Sikh army in Gujarat. The  Commissioner of Jallandhara at that time was Sir Henry Lawrence and Kangra district collector Mr. Barnes.

In 1849, Ram Singh again took up a position on the Dalle ka Dhar near Pathankot, where a pitched battle took place, and finally, Ram Singh was taken in Kangra having been betrayed by a Brahmin friend named Pahar Chand. Ram Singh was banished to Singapur (or Rangoon, where he died. A jagir of Rs.5,000/- which was granted to Jaswant Singh by Sir John Lawrence, was doubled in A.D. 1861 for the loyalty shown by the minor Raja during the 1857 revolt. 

 

1846 में, ईस्ट इंडिया कंपनी ने कांगड़ा घाटी पर कब्जा कर लिया और स्थानीय शासकों को अपने अधीन कर लिया। जसवंत सिंह को 5,000 / – रुपये के वार्षिक जागीर से भी सम्मानित किया गया था।  और नूरपुर राज्य का कांगड़ा में विलय कर दिया गया। जम्मू की पहाड़ियों से एक बल इकट्ठा करते हुए, राम सिंह ने विद्रोह किया और अचानक रावी नदी को पार किया और शाहपुर किले पर कब्जा कर लिया, जहाँ उन्होंने नूरपुर के राजा जसवंत सिंह, (1848 में) और खुद को उनके वज़ीर के रूप में घोषित किया, लेकिन बाद में ब्रिटिश सेना के आगमन पर , राम सिंह गुजरात में सिख सेना में भाग गया। उस समय जलंधर के आयुक्त सर हेनरी लॉरेंस और कांगड़ा जिला कलेक्टर श्री बार्न्स थे।

1849 में, राम सिंह ने फिर से पठानकोट के पास दल्ले का धार पर एक पद ग्रहण किया, जहाँ एक युद्ध हुआ था, और अंत में कांगड़ा में राम सिंह को लिया गया, जिसे प्रहार चंद नाम के एक ब्राह्मण मित्र ने धोखा दिया था। राम सिंह को सिंगापुर (या रंगून, जहां उनकी मृत्यु हो गई थी) में ले जाया गया था। 

#12. ‘Madho Rai ki Jaleb’ is the main attraction of which popular Himachali fair? / माधो राय की जलेब ’किस लोकप्रिय हिमाचली मेले का मुख्य आकर्षण है?

The Shivratri fair of Mandi offers a perspective of the deity culture of Himachal Pradesh. Over 200 deities congregate in Mandi town every year to take part in the weeklong fair, and stay there in temporary camps along with their followers.

The festival centres on “Madho Rai” (Lord Vishnu), protector deity of Mandi, and Lord Shiva of the Bhootnath temple. The main attraction of the event is the ‘Jaleb’ (procession of deities) led by Madho Rai. Most of the deities along with their followers join it.

Kamrunag, the deity known as rain God, also visit Mandi town to preside over the fair as chief guest. After meeting Lord Madho Rai on the very first day, he moves towards the Tarnatemple on hilltop and stays there all seven days to keep a watch on the event.

मंडी का शिवरात्रि मेला हिमाचल प्रदेश की देव संस्कृति का एक दृश्य  प्रस्तुत करता है। सप्ताह भर चलने वाले मेले में हिस्सा लेने के लिए हर साल मंडी शहर में 200 से अधिक देवता एकत्रित होते हैं, और अपने अनुयायियों के साथ अस्थायी शिविरों में रहते हैं।

यह त्यौहार “माधो राय” (भगवान विष्णु), मंडी के रक्षक देवता, और भूतनाथ मंदिर के भगवान शिव पर केंद्रित है। आयोजन का मुख्य आकर्षण माधो राय के नेतृत्व में ‘जलेब’ (देवताओं का जुलूस) है। अधिकांश देवता अपने अनुयायियों के साथ इसमें सम्मिलित होते हैं।

बारिश के देवता के रूप में जाने जाने वाले देवता कमरुनाग भी मेले की मुख्य अतिथि के रूप में अध्यक्षता करने के लिए मंडी शहर आते हैं। पहले दिन भगवान माधो राय से मिलने के बाद, वह हिलटॉप पर तरना मंदिर की ओर बढ़ते हैं और इस आयोजन पर नजर रखने के लिए पूरे सात दिन वहां रुकते हैं।

#13. What is the architectural style of the temple built on the edge of the Prashar Lake? / पराशर झील के किनारे पर निर्मित मंदिर की स्थापत्य शैली क्या है?

The “Prashar Lake” which has perimeter of about 300 mtr.is decorated by a floating island in it. Traditionally, it is believed that the lake was formed as result of striking of rod (Gurj) by Rishi Prashar and water came out and took shape of the lake. An ancient Pagoda style temple dedicated to the Rishi Prashar, the patron God of Mandi region, stands besides the lake. The temple has been constructed by the King Ban Sen in 13-14th century with the Rishi being present in the form of a Pindi (stone). It is also said that the whole temple was built by using single deodar tree and it took 12 years to complete the temple construction.

“प्रशार झील” जिसकी परिधि लगभग 300 मीटर है, इसमें एक तैरते द्वीप है। परंपरागत रूप से, यह माना जाता है कि ऋषि पराशर द्वारा छड़ी (गुरज) के प्रहार के परिणामस्वरूप झील का निर्माण हुआ था और पानी बाहर आया और झील का आकार ले लिया। मंडी क्षेत्र के संरक्षक भगवान ऋषि पराशर को समर्पित एक प्राचीन पैगोडा शैली का मंदिर झील के पास  है। मंदिर का निर्माण राजा बान सेन ने 13-14 वीं शताब्दी में किया था, जिसमें ऋषि पिंडी (पत्थर) के रूप में मौजूद है  यह भी कहा जाता है कि पूरे मंदिर को एकल देवदार के पेड़ का उपयोग करके बनाया गया था और मंदिर के निर्माण को पूरा करने में 12 साल लग गए।

#14. ‘Dohru‘ is a traditional woollen dress worn by the women of which district? / दोहरू किस जिले की महिलाओं द्वारा पहनी जाने वाली पारंपरिक ऊनी पोशाक है?

The people of the district dress mostly in woolen clothes. Their clothing is well suited to the climate and is artistic too in its own distinctive way.

Head dress: of men and women is a round woolen cap called thepang in the local dialect. It is generally of light grey or of white colour with a colour velvet band on the outer fold. Band of green colour is most liked. Crimson blue, yellow, etc. may also be worn.

Men wear woolen shirts called chamn Kurti made of woolen cloth and tailored in the village. Another type of dress which the men wear is Chhuba. It is a long woolen coat somewhat resembling an Achkan. A sleeveless woolen jacket worn outside the Chhuba. Men wear woolen churidar pajama.

Women wrap up a woolen shawl-like garment called dohru. The first wrap of dohru is on the back with an embroidered border displayed throughout its length up to the heels. Darker shades of colours are preferred for dohru. Besides beautiful coloured shawls are also worn by them over their shoulders. Choli a sort of full sleeves blouse is worn by the women. Some of them have decorative lining also. 

The traditional footwear worn by the Kinnauras was made of wool and goat hair with the sole of goat hide.

 

जिले के लोग ज्यादातर ऊनी कपड़े पहनते हैं। वहाँ के कपड़े जलवायु के अनुकूल हैं और अपने विशिष्ट तरीके से कलात्मक भी हैं।

प्रमुख पोशाक: पुरुषों और महिलाओं की एक गोल ऊनी टोपी होती है जिसे स्थानीय बोली में थेपांग कहा जाता है। यह आम तौर पर हल्के भूरे या सफेद रंग का होता है जिसमें बाहरी मोड़ पर एक रंग मखमल बैंड होता है। ग्रीन कलर का बैंड सबसे ज्यादा पसंद किया जाता है। क्रिमसन नीला, पीला आदि भी पहना जा सकता है।

पुरुष ऊनी कपड़े से बने ऊनी शर्ट पहनते हैं और गाँव में सिलवाए जाते हैं। एक अन्य प्रकार की पोशाक जो पुरुष पहनते हैं वह है छउबा। यह लंबे ऊनी कोट है जो कुछ हद तक अचकन जैसा दिखता है। छौबा के बाहर पहना जाने वाला एक स्लीवलेस ऊनी जैकेट। पुरुष ऊनी चूड़ीदार पायजामा पहनते हैं।

महिलाएं ऊनी शाल लपेटती हैं जैसे डोरू नामक परिधान। डोरू का पहला रैप हाइब्रिड बॉर्डर के साथ पीठ पर है, जो इसकी लंबाई तक हील्स तक प्रदर्शित है। डोरू के लिए रंगों के गहरे रंगों को पसंद किया जाता है। इसके अलावा सुंदर रंग के शॉल भी उनके कंधे पर पहने जाते हैं। चोली एक तरह का फुल स्लीव्स ब्लाउज महिलाओं द्वारा पहना जाता है। उनमें से कुछ में सजावटी अस्तर भी है।

किन्नौर द्वारा पहने जाने वाले पारंपरिक जूते ऊन और बकरी के बालों से बने होते थे, जिनमें केवल बकरी छिपी होती थी।

#15. What is the approximate capacity of ‘Shontong Karcham’ Hydro Electric Power Project? / शोंगटोंग करछम ’हाइड्रो इलेक्ट्रिक पावर प्रोजेक्ट की अनुमानित क्षमता कितनी है?

Shongtong Karchham Hydro Electric Project, a run-of-river scheme, on the river Satluj in village Powari, Ralli Distt. Kinnaur of H.P. to generate 450 MW of power.

 

शोंगटोंग करछम हाइड्रो इलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट, हिमाचल प्रदेश के ग्राम पावरी रल्ली जिला किन्नौर में सतलुज नदी पर एक रन-ऑफ-द-स्कीम 450 मेगावाट बिजली पैदा करने के लिए।

#16. In which district Central Government approved Rs. 80 lakh in 2011 for setting up of Snow Leopard centre? / किस जिले में बर्फीला तेंदुआ केंद्र की स्थापना के लिए केंद्र सरकार ने २०११ में 80 लाख रुपय दिए ?

The Snow Leopard Conservation Project will finally take off in the cold desert of Spiti with the Centre releasing the first installment of Rs 80 lakh for the implementation of the Rs 5.5 crore project.

The most remarkable feature of the project is the Snow Leopard Research Centre to be set up at Kibber. It will be the only second such institution in the world to be set up on the pattern of the one existing in Mongolia.

The integrated project formulated by the Mysore-based Nature Conservation Foundation (NCF) is being implemented in five trans-Himalayan states where the prized animal is found. The project was approved in principle in 2007 but for the implementation in the field, a comprehensive management plan was to be formulated after conducting a baseline survey.

The NCF which has been working on the endangered animal in Spiti for the past 20 years has already finalised the plan and now implementation would start.

Principal secretary, Forests, Sudipto Roy, who pursued the matter for release of funds, said it was designed on the pattern of the Project Tiger to be funded by the Centre.

With relatively less biotic interference, the Spiti valley was the stronghold of the endangered cat in India. An important feature was that the project would involve the local communities in monitoring and conservation to help reduce the snow leopard-migratory grazier conflict which had taken a heavy toll on the animal.

It is a unique collaborative project on which snow leopard experts are working closely with the senior wildlife officials to develop a good, participatory management plan for the unusual Spiti landscape on the basis of authentic scientific data.

The painstaking research conducted over 4000 sq km by wildlife experts in upper Spiti has revealed the presence of 4 or 5 snow leopards per 100 square km. The presence of other high altitude species like ibex, snow cock, blue sheep, and the grey wolf has also been noted during the research study to co-relate it with the snow leopard through the prey-predator relationship and delineate its domain and movement. It is for the first time that so much research has been carried out in preparing a management plan before starting the implementation of the project.

Besides Himachal, the project is being implemented in Jammu and Kashmir, Uttrakhand, Sikkim, and Arunachal Pradesh where the animal is found.

The snow leopard is a globally endangered species, restricted to the high mountains of Central Asia and rough estimates place its global population at around 7,500, which is believed to be fast depleting.

 

स्नो लेपर्ड संरक्षण परियोजना अंतत: 5.5 करोड़ रुपये की परियोजना के कार्यान्वयन के लिए 80 लाख रुपये की पहली किस्त जारी करने के साथ केंद्र के साथ स्पीति के ठंडे रेगिस्तान में उड़ान भरेगी।

परियोजना की सबसे उल्लेखनीय विशेषता किब्बर में स्थापित किया जाने वाला स्नो लेपर्ड रिसर्च सेंटर है। यह दुनिया का ऐसा दूसरा संस्थान होगा।

मैसूर स्थित प्रकृति संरक्षण फाउंडेशन (NCF) द्वारा तैयार एकीकृत परियोजना को पांच ट्रांस-हिमालयी राज्यों में लागू किया जा रहा है जहां बेशकीमती जानवर पाए जाते हैं। परियोजना को 2007 में सिद्धांत रूप में अनुमोदित किया गया था, लेकिन इस क्षेत्र में कार्यान्वयन के लिए, एक आधारभूत सर्वेक्षण करने के बाद एक व्यापक प्रबंधन योजना तैयार की जानी थी।

एनसीएफ जो पिछले 20 वर्षों से स्पीति में लुप्तप्राय जानवरों पर काम कर रहा है, पहले ही योजना को अंतिम रूप दे चुका है और अब कार्यान्वयन शुरू होगा।

प्रमुख सचिव, वन, सुदीप्तो रॉय, जिन्होंने धन जारी करने के मामले का पीछा किया, ने कहा कि इसे केंद्र द्वारा वित्त पोषित किए जाने वाले प्रोजेक्ट टाइगर की तर्ज पर बनाया गया है।

अपेक्षाकृत कम बायोटिक हस्तक्षेप के साथ, स्पीति घाटी भारत में लुप्तप्राय तेंदुए का गढ़ था। एक महत्वपूर्ण विशेषता यह थी कि इस परियोजना में हिम तेंदुए-प्रवासी चराई संघर्ष को कम करने में मदद करने के लिए स्थानीय समुदायों को निगरानी और संरक्षण में शामिल किया गया था जिसने जानवर का भारी टोल लिया था।

यह एक अनूठी सहयोगी परियोजना है, जिस पर हिम तेंदुए के विशेषज्ञ प्रामाणिक वैज्ञानिक आंकड़ों के आधार पर असामान्य स्पीति परिदृश्य के लिए एक अच्छा, भागीदारी प्रबंधन योजना विकसित करने के लिए वरिष्ठ वन्यजीव अधिकारियों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं।

ऊपरी स्पीति में वन्यजीव विशेषज्ञों द्वारा 4000 वर्ग किमी पर किए गए श्रमसाध्य शोध में 100 वर्ग किमी प्रति 4 या 5 हिम तेंदुओं की उपस्थिति का पता चला है। अन्य उच्च ऊंचाई वाली प्रजातियों जैसे ibex, स्नो कॉक, ब्लू शीप और ग्रे वुल्फ की उपस्थिति को भी इस शोध के अध्ययन के दौरान नोट किया गया है ताकि इसे पूर्व-शिकारी संबंध और अपने डोमेन और आंदोलन के माध्यम से हिम तेंदुए के साथ संबद्ध किया जा सके। यह पहली बार है कि परियोजना के कार्यान्वयन को शुरू करने से पहले प्रबंधन योजना तैयार करने में इतना शोध किया गया है।

हिमाचल के अलावा, यह परियोजना जम्मू और कश्मीर, उत्तराखंड, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश में कार्यान्वित की जा रही है जहां जानवर पाए जाते हैं।

हिम तेंदुआ एक विश्व स्तर पर लुप्तप्राय प्रजाति है, जो मध्य एशिया के ऊंचे पहाड़ों तक सीमित है और मोटे तौर पर अनुमान है कि इसकी वैश्विक आबादी लगभग 7,500 है, जो तेजी से घट रही है।

#17. To improve the Gross Enrolment Ratio (GER) in Higher Education, the government of H.P. has adopted ‘Rashtriya Uchtar Shikha Abhiyan’ the centrally scheme in the year: / उच्च शिक्षा में सकल नामांकन अनुपात (GER) में सुधार के लिए, हिमाचल प्रदेश की सरकार ने राष्ट्रीय उचत्तर शिक्षा अभियान ’जो केन्द्र की योजना है को किस वर्ष में अपनाया है :

The salient objectives of RUSA are to;

  • Improve the overall quality of state institutions by ensuring conformity to prescribed norms and standards and adopt accreditation as a mandatory quality assurance framework.
  • Usher transformative reforms in the state higher education system by creating a facilitating institutional structure for planning and monitoring at the state level, promoting autonomy in State Universities, and improving governance in institutions.
  • Ensure reforms in the affiliation, academic, and examination systems.
  • Ensure adequate availability of quality faculty in all higher educational institutions and ensure capacity building at all levels of employment.
  • Create an enabling atmosphere in the higher educational institutions to devote themselves to research and innovations.
  • Expand the institutional base by creating additional capacity in existing institutions and establishing new institutions, in order to achieve enrollment targets.
  • Correct regional imbalances in access to higher education by setting up institutions in unserved & underserved areas.
  • Improve equity in higher education by providing adequate opportunities of higher education to SC/STs and socially and educationally backward classes; promote inclusion of women, minorities, and differently-abled persons.

A financial outlay of Rs 7100 crores has been earmarked for 3 years beginning 2017-18 to 2019-20. The project cost in the public-funded institutions for all sub-components is shared between the Central Government and State Governments in the ratio of 90:10 for the North-Eastern States, J&K, Himachal Pradesh, and Uttarakhand, 60:40 for other States and UTs with Legislature and 100:0 for UTs without Legislature.

 

रूसा के मुख्य उद्देश्य हैं;

  • निर्धारित मानदंडों और मानकों के अनुरूप सुनिश्चित करके राज्य संस्थानों की समग्र गुणवत्ता में सुधार करना और एक अनिवार्य गुणवत्ता आश्वासन ढांचे के रूप में मान्यता को अपनाना। 
  • राज्य स्तर पर योजना और निगरानी के लिए संस्थागत ढांचा तैयार करके, राज्य विश्वविद्यालयों में स्वायत्तता को बढ़ावा देने और संस्थानों में शासन में सुधार करके राज्य उच्च शिक्षा प्रणाली में परिवर्तनकारी सुधार।
  • संबद्धता, शैक्षणिक और परीक्षा प्रणालियों में सुधार सुनिश्चित करें।
  • सभी उच्च शिक्षण संस्थानों में गुणवत्ता संकाय की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करें और रोजगार के सभी स्तरों पर क्षमता निर्माण सुनिश्चित करें।
  • खुद को अनुसंधान और नवाचारों के लिए समर्पित करने के लिए उच्च शिक्षण संस्थानों में सक्षम माहौल बनाएं।
  • नामांकन लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए मौजूदा संस्थानों में अतिरिक्त क्षमता बनाकर और नए संस्थानों की स्थापना करके संस्थागत आधार का विस्तार करें।
  • अनछुए और अछूते क्षेत्रों में संस्थान स्थापित करके उच्च शिक्षा की पहुंच में क्षेत्रीय असंतुलन को ठीक करना।
  • एससी / एसटी और सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्गों को उच्च शिक्षा के पर्याप्त अवसर प्रदान करके उच्च शिक्षा में न्यायसम्य में सुधार; महिलाओं, अल्पसंख्यकों और अलग-अलग विकलांग व्यक्तियों को शामिल करने को बढ़ावा देना। 

2017-18 से 2019-20 तक 3 वर्षों के लिए 7100 करोड़ रुपये का वित्तीय परिव्यय रखा गया है। सभी उप-घटकों के लिए सार्वजनिक वित्त पोषित संस्थानों में परियोजना लागत केंद्र सरकार और राज्य सरकारों के बीच पूर्वोत्तर राज्यों, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के लिए 90:10 के अनुपात में साझा की जाती है, अन्य राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के लिए 60:40, और विधानमंडल के बिना संघ शासित प्रदेशों के लिए 100: 0।

#18. Who is the author of the book ‘Polyandry in the Himalayas’? / ';हिमालय में पॉलेंड्री'; पुस्तक के लेखक कौन हैं?

Dr. Y.S. Parmar – Born on August 4, 1906, in Bagthan village, Sirmaur, Dr. Y.S, Parmar is called the creator of H.P. He was educated at F.C. College Lahore and Canning College Lucknow. He was deputy judge and first-class magistrate in the princely state of Sirmaur till 1937 AD. He was made the District and Sessions. 

Judge of the Sirmaur princely state from 1937-41. He became a member of the Chief Commissioner’s Advisory Council in 1948. Apart from this, he represented Himachal Pradesh in the constituent assembly.

He became the first Chief Minister of H.P. in 1952. He became the Chief Minister of HP four times (1952-56, 1963-67, 1967-71, 1972-77). He became the Supreme Court advocate in 1961 AD. He died on May 2 1981 AD. He wrote many books, such as –

  • Himachal Pradesh its proper shape and status
  • Himachal Pradesh Case for Statehood
  • Polyandry in the Himalayas

डॉ. वाई.एस. परमार-4 अगस्त 1906 ई. को सिरमौर के बागथन गाँव में जन्मे डॉ. वाई. एस. परमार को हि.प्र. का निर्माता कहा जाता है। उन्होंने एफ.सी. कॉलेज लाहौर तथा केनिंग कॉलेज लखनऊ से शिक्षा प्राप्त की। वह 1937 ई. तक सिरमौर रियासत में उप-न्यायाधीश तथा प्रथम श्रेणी के मेजिस्ट्रेट थे। 

उन्हें 1937-41 तक सिरमौर रियासत का जिला व सत्र न्यायाधीश बनाया गया। वह 1948 में मुख्य आयुक्त की सलाहकार परिषद् के सदस्य बने। इसके अलावा उन्होंने संविधान सभा में हि.प्र, का प्रतिनिधित्व किया। 

वह 1952 में हि.प्र. के पहले मुख्यमंत्री बने । वह चार बार, (1952-56 1963-67, 1967-71, 1972-77) हि.प्र. के मुख्यमंत्री बने। वह 1961 ई. में सर्वोच्च न्यायालय के अधिवक्ता बने। उनका देहाँत 2 मई, 1981 ई. को हुआ। उन्होंने बहुत सी पुस्तकें लिखीं, जैसे-

H.P its proper shape & status

H.P Case for Statehood

हिमालय पॉलीएण्डरी की सामाजिक आर्थिक पृष्ठ भूमि ।

#19. Which famous football tournament was started in 1888 from Annadale? / किस प्रसिद्ध फुटबॉल टूर्नामेंट की शुरुआत 1888 में अन्नाडेल से हुई थी?

First Durand Cup

The first Durand Cup was played in the Annadale ground in Shimla in 1888. The most prestigious Football Tournament-Durand Cup was started by Sir Durand Mortimer. It is the oldest football tournament in Asia and the second oldest in the world. In the inaugural tournament, just six teams participated and Royal Scots Fusiliers emerged Champions beating Highland Light Infantry 2-1 in the final. Till 1940 the tournament was played in Shimla.

पहला डूरंड कप

पहला डूरंड कप शिमला के अन्नाडेल मैदान में 1888 में खेला गया था। सबसे प्रतिष्ठित फुटबॉल टूर्नामेंट-डूरंड कप सर डुरंड मोर्टिमर द्वारा शुरू किया गया था। यह एशिया का सबसे पुराना और दुनिया में दूसरा सबसे पुराना फुटबॉल टूर्नामेंट है। उद्घाटन टूर्नामेंट में सिर्फ छह टीमों ने भाग लिया और रॉयल स्कॉट्स फुसिलिर ने फाइनल में हाईलैंड लाइट इन्फैंट्री को 2-1 से हराकर चैंपियंस को उभारा। 1940 तक यह टूर्नामेंट शिमला में खेला जाता था।

#20. The Mushroom Development Project in Palampur was launched in 1985 with the introduction of the technology of which country? / पालमपुर में मशरूम विकास परियोजना 1985 में किस देश की तकनीक की शुरुआत के साथ शुरू की गई थी?

The modern technology in commercial cultivation of mushroom was introduced under two externally aided projects implemented in the state viz.FAO/UNDP Mushroom Development Project Chambaghat, Solan during 6th Five Year Plan and Indo Dutch Mushroom Development Project at Palampur Distt. Kangra during the Seventh Five Year Plan.

Mushroom cultivation was commercialized in 1977 in Solan. Later in 1985, the Mushroom Development project was introduced in Palampur. The project was officially launched as a Pilot project and was aimed at introducing the Dutch Technology that could be used for the cultivation of Mushrooms.

The project was made operational only by late 1992. After this, the government had declared Solan district as the State’s Mushroom district.

 

मशरूम की व्यावसायिक खेती में आधुनिक तकनीक को राज्य में कार्यान्वित की गई दो सहायता प्राप्त परियोजनाओं के तहत FAO/UNDP मशरूम विकास परियोजना में पेश किया गया था। 6 वीं पंचवर्षीय योजना के दौरान सोलन तथा सातवीं पंचवर्षीय योजना के दौरान कांगड़ा के पालमपुर जिले में इंडो डच मशरूम परियोजना। 

1977 में सोलन में मशरूम की खेती का व्यवसायीकरण किया गया। बाद में 1985 में, पालमपुर में मशरूम विकास परियोजना शुरू की गई। परियोजना को आधिकारिक तौर पर एक पायलट परियोजना के रूप में लॉन्च किया गया था और इसका उद्देश्य डच तकनीक की शुरुआत करना था जिसका उपयोग मशरूम की खेती के लिए किया जा सकता है।

परियोजना 1992 के अंत तक ही शुरू हो गई थी। इसके बाद सरकार ने सोलन जिले को राज्य का मशरूम जिला घोषित किया था। 

#21. What was the approximate decadal population growth rate of Himachal Pradesh in census 2011? / 2011 की जनगणना में हिमाचल प्रदेश की अनुमानित दशकीय जनसंख्या वृद्धि दर कितनी थी?

The decadal population growth in Himachal Pradesh declined from 17.53 per cent in 2001 to 12.94 per cent in 2011 .Himachal Pradesh ‘s population increased from 60,77,900 in 2001 to 68,64,602 in 2011, with an increase in population by 786,702 in past one decade. The total population has increased from 60.68 lakh to 68.64 lakh which included 34,81,871 male and 32,82,729 female and the increase of population was 12.7 per cent in rural areas and 15.3 per cent in urban areas.
While the population of Himachal Pradesh increased by 12.9 per cent from 2001 to 2011, the growth rate of population of children in the age group of 0-6 years declined marginally
The biggest Kangra district has highest population of 15,10,751 while Lahaul and Spiti district has lowest population of 31,564.
The population growth was 16.3 per cent in Una district and just 5 per cent in tribal Lahaul and Spiti district.

हिमाचल प्रदेश में जनसंख्या की वृद्धि दर 2001 में 17.53 प्रतिशत से घटकर 2011 में 12.94 प्रतिशत हो गई। हिमाचल प्रदेश की जनसंख्या 2001 में 60,77,900 से बढ़कर 2011 में 68,64,602 हो गई, पिछले एक दशक में जनसंख्या में 786,702 की वृद्धि हुई। कुल जनसंख्या 60.68 लाख से बढ़कर 68.64 लाख हो गई है जिसमें 34,81,871 पुरुष और 32,82,729 महिलाएं शामिल हैं और ग्रामीण क्षेत्रों में जनसंख्या में 12.7 प्रतिशत और शहरी क्षेत्रों में 15.3 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
जबकि 2001 से 2011 तक हिमाचल प्रदेश की जनसंख्या में 12.9 प्रतिशत की वृद्धि हुई, 0-6 वर्ष की आयु के बच्चों की जनसंख्या की वृद्धि दर में मामूली गिरावट आई
सबसे बड़े कांगड़ा जिले की आबादी सबसे अधिक 15,10,751 है जबकि लाहौल और स्पीति जिले की आबादी सबसे कम 31,564 है।
ऊना जिले में जनसंख्या वृद्धि 16.3 प्रतिशत और जनजातीय लाहौल और स्पीति जिले में सिर्फ 5 प्रतिशत थी।

finish

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